सिंधु घाटी सभ्यता किया था : सिंधु घाटी सभ्यता दक्षिण एशिया के उत्तर – पश्चिमी क्षेत्र में एक ‘कांस्ययुगीन सभ्यता’ थी, जिसका विस्तार आधुनिक भारत, पाकिस्तान और अफगानिस्तान के क्षेत्रों तक था। यह दक्षिण एशिया की पहली शहरी सभ्यता थी, जो मेसोपोटामिया और मिस्र के समकालीन थी.
हड़प्पा सभ्यता का समय काल : 2600 – 1900 ईसा पूर्व
चूँकि इस सभ्यता का विकास सिंधु नदी व उसकी सहायक नदियों के आस पास के क्षेत्र में हुआ था, इसीलिए इसे ‘सिंधु घाटी सभ्यता’ का नाम दिया गया है। इस सभ्यता की खुदाई सबसे पहले वर्तमान पाकिस्तान में स्थित ‘हड़प्पा’ नामक स्थल पर हुई थी। अतः इसे ‘हड़प्पा सभ्यता’ भी कहा गय
खोज (Discovery) :
अध्ययन करते है साक्ष्य के आधार पर साक्ष्य दो प्रकार के होते है :
i. लिखित साक्ष्य ii. पुरातात्विक साक्ष्य
1. लिखित साक्ष्य :
i.चार्ल्स मेशन (1826) : हड़प्पा टीले की बात सबसे पहले कही थी परन्तु ब्रिटेन ने ध्यान नहीं दिया था.
ii. कनिंघम (1853&1873) : हड़प्पा टीले की बात करने वाला दूसरा व्यक्ति था परन्तु ब्रिटिश रुचि नहीं लिया.
iii. बर्टन बंधू : 1856
- बर्टन बंधुओं ने ही सबसे पहले हड़प्पा सभ्यता के अवशेषों (पक्की ईंटों) को व्यापक स्तर पर उजागर किया था, हालांकि वे इसे एक ऐतिहासिक सभ्यता न समझकर केवल रेलवे ट्रैक के लिए रोड़ी (Ballast) मान बैठे.
- वर्ष 1856 में उन्हें कराची से लाहौर के बीच पंजाब रेलवे लाइन बिछाने का काम सौंपा गया था. पेशेवर इंजीनियर थे.
- रेलवे ट्रैक बिछाने के लिए उन्हें जमीन के नीचे ठोस गिट्टी या रोड़ी (Ballast) की सख्त जरूरत थी.
- काम के दौरान उन्हें वर्तमान पाकिस्तान के पंजाब प्रांत में हड़प्पा नामक गाँव के पास एक बहुत बड़ा प्राचीन टीला मिला.
- इस टीले की खुदाई करने पर उन्हें लाखों की संख्या में बेहद मजबूत और अच्छी तरह पकी हुई लाल ईंटें मिलीं.
- बर्टन बंधु उस समय यह नहीं समझ पाए कि यह ईंटें हजारों साल पुरानी किसी महान नगरीय सभ्यता का हिस्सा हैं उन्होंने उन ईंटों को एक मुफ़्त और तैयार “खदान” समझा . ठेकेदारों और मजदूरों ने हड़प्पा के प्राचीन भवनों को तोड़कर लगभग 93 मील (150 किमी) लंबी रेलवे पटरी के नीचे उन ऐतिहासिक ईंटों को रोड़ी के रूप में बिछा दिया.
- इस खुदाई के दौरान मजदूरों को कुछ अजीबोगरीब मोहरें (Seals) और प्राचीन कलाकृतियाँ भी मिलीं.
इन खोजों की जानकारी आगे चलकर पुरातत्वविदों तक पहुँची। इसी घटना के बाद अलेक्जेंडर कनिंघम (भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण के पहले महानिदेशक) ने इस स्थल का दौरा किया. - अंततः वर्ष 1921 में दयाराम साहनी और जॉन मार्शल के नेतृत्व में यहाँ आधिकारिक खुदाई हुई और दुनिया के सामने भारत की सबसे प्राचीन ‘सिंधु घाटी सभ्यता’ का अनावरण हुआ.
Ø रेल पटरी : लाहौर कराँची
Ø1856 : बर्टन बंधू ने साक्ष्य दिया था फिर भी ब्रिटिश रूचि नही लिया.
1856 : The Burton brothers gave evidence, yet the British did not take any interest.
सिंधु घाटी सभ्यता का काल खंड :
सिंधु घाटी सभ्यता के तीन चरण है
i. प्रारंभिक हड़प्पाई सभ्यता (3300ई.पू.-2600ई.पू. तक)
ii. परिपक्व हड़प्पाई सभ्यता (2600ई.पू-1900ई.पू. तक)
iii. उत्तर हड़प्पाई सभ्यता (1900ई.पु.-1300ई.पू. तक)
प्रारंभिक हड़प्पाई सभ्यता (3300 – 2600ई.पू. )
इसे क्षेत्रीयकरण युग के नाम से जाना जाता है
आद्य नगरीय चरण: कस्बों का क्रमिक विकास, ग्रामीण से शहरी जीवन की ओर संक्रमण.
इस युग के बस्तियों घग्घर – हाकरा चरण से संबंधित है
प्रमुख विशेषताएँ :
किलेबंदी, पत्थरकारी, मनका निर्माण, और धातु- शिल्पकला में कुशल.
पहियेदार परिवहन और व्यापार नेटवर्क का उपयोग.बाद में देखे गए बड़े शहरों और उन्नत शिल्प विशेषज्ञता का अभाव था.
हड़प्पाई लिपि का प्रथम साक्ष लगभग 3000 ई.पू में मिला था.
प्रमुख प्रारंभिक हड़प्पा स्थल :
- कालीबंगा (राजस्थान, भारत): यहाँ प्रागैतिहासिक और प्रारंभिक हड़प्पा काल के अवशेष मिले हैं.
- रहमान ढेरी (पाकिस्तान): यह प्रारंभिक ग्रामीण संस्कृति और क्रमिक शहरीकरण का एक मुख्य केंद्र था.
- कोट डीजी (पाकिस्तान): यहाँ केंद्रीय सत्ता और किलेबंद बस्तियों के शुरुआती प्रमाण मिलते हैं.
- आमरी (पाकिस्तान): यह परिपक्व हड़प्पा चरण से पहले की संस्कृति का प्रतिनिधित्व करता है.
परिपक्व हड़प्पाई सभ्यता (2600 -1900 ई.पू.)
परिपक्व हड़प्पाई सभ्यता को एकीकरण युग के रूप में जाना जाता है.
शहरी चरण : बड़े शहरों का उदय, परिपक्व हड़प्पा संस्कृति का उदय हुआ था
सामान्य लक्षण : लाल और काले मिट्टी के बर्तन, टेराकोटा (आग में जलाकर पकाई गई
मिट्टी) मूर्तियाँ, और मानकीकृत ईंटें (1:2:4 अनुपात) था
प्रमुख परिपक्व हड़प्पा स्थल
- हड़प्पा: यह पाकिस्तान के पंजाब प्रांत में रावी नदी के तट पर स्थित पहला खोजा गया स्थल है.
- मोहनजोदड़ो: यह पाकिस्तान के सिंध प्रांत में सिंधु नदी के पास स्थित सबसे बड़ा नगर है, जहाँ विशाल स्नानगार मिला है.
- राखीगढ़ी: यह भारत के हरियाणा राज्य में स्थित सबसे बड़ा हड़प्पाई स्थल है.
- धोलावीरा: यह गुजरात के कच्छ जिले में है, जो अपनी उत्कृष्ट जल प्रबंधन प्रणाली के लिए प्रसिद्ध है.
- लोथल: यह गुजरात में भोगवा नदी के पास स्थित एक प्रमुख प्राचीन बंदरगाह (पोर्ट टाउन) था.
- कालीबंगन: यह राजस्थान में घग्गर नदी के किनारे स्थित है, जहाँ जुते हुए खेतों के साक्ष्य मिले हैं.
उत्तर हड़प्पाई सभ्यता (1900 -1300ई.पू.)
उत्तर हड़प्पाई सभ्यता को स्थानीयकरण युग के रूप में जाना जाता है.
उत्तर – शहरी चरण : शहरों का पतन और सांस्कृतिक विखंडन आरम्भ हुआ.
प्रारंभिक चीनी सभ्यता परिपक्व अवस्था की तुलना में बस्तियाँ छोटी थीं. मुहरों, मिट्टी के बर्तनों और वजन में धीरे-धीरे परिवर्तन हुए.
उत्तर हड़प्पाई प्रमुख स्थल
- रंगपुर (गुजरात): यहाँ से धान की भूसी और उत्तर हड़प्पा कालीन मृतभांड मिले हैं.
- रोजड़ी (गुजरात): यह सौराष्ट्र क्षेत्र का एक महत्वपूर्ण परवर्ती स्थल है.
- हुलास (उत्तर प्रदेश): यहाँ से उत्तर हड़प्पा काल के अवशेष और कृषि साक्ष्य मिले हैं.
- प्रभात पाटन (गुजरात): यहाँ विकसित हड़प्पा संस्कृति के बाद की स्थानीय विशेषताएँ दिखती हैं.
हड़प्पा संस्कृति का भौगोलिक विस्तार (Geographical Extent of Harappan Culture) :
हड़प्पा सभ्यता आकार में त्रिभुजाकार थी
क्षेत्रफल : यह लगभग 1,299,600 वर्ग किलोमीटर के क्षेत्र में फैला हुआ था . भारत के झेत्र फल का 40% था
- सबसे उत्तरी स्थलः मांडा (जम्मू)
- सबसे दक्षिणी स्थलः दैमाबाद (महाराष्ट्र)
- सबसे पूर्वी स्थल: आलमगीरपुर, मेरठ (उत्तर प्रदेश )
- सबसे पश्चिमी स्थल: सुत्कागेंडोर ( बलूचिस्तान)
सिंधु घाटी सभ्यता की समकालीन सभ्यताएँ :

