परिचय
- सातवाहन (आंध्र) राजवंश दक्षिण भारत (मुख्यतः दक्कन क्षेत्र) का सबसे लंबे समय तक शासन करने वाला राजवंश था। मौर्य साम्राज्य के पतन के बाद इन्होंने दक्कन में अपनी स्वतंत्र सत्ता स्थापित की। इनकी राजधानी प्रतिष्ठान (पैठण, गोदावरी नदी के किनारे) थी, बाद में धान्यकटक/अमरावती भी महत्वपूर्ण केंद्र बना.
स्रोत:
- सिक्के (सीसा, तांबा, पोटीन, चांदी
- पुराण (मत्स्य पुराण, वायु पुराण) — शासकों की सूची
- नानाघाट अभिलेख (नयनिका/नागनिका का)
- नासिक प्रशस्ति (गौतमी बालश्री का)
- जुनागढ़ शिलालेख (रुद्रदामन का)
संस्थापक — सिमुक (शिमुक)
- सातवाहन वंश का संस्थापक सिमुक था, मगध क्षेत्र में अंतिम कण्व शासकों की शक्ति को समाप्त कर दक्कन में अपना स्वतंत्र राज्य स्थापित किया.
- पुराणों में इसे “शिश्रुक”, “सिंधुक” आदि नामों से भी जाना जाता है.
- नानाघाट अभिलेख में इसे राजवंश के आदि पुरुष के रूप में पूजा जाता दिखाया गया है (देवकुल में मूर्ति स्थापित).
- इसने लगभग 23 वर्षों तक शासन किया.
- मृत्यु के बाद इसका भाई कृष्ण (कान्हा) उत्तराधिकारी बना, जिसने नासिक क्षेत्र तक राज्य विस्तार किया.
प्रमुख शासक
सातकर्णी प्रथम
- सातवाहन वंश का प्रथम शक्तिशाली शासक।
- उपाधि धारण की — “दक्षिणापथपति”।
- दो अश्वमेध यज्ञ तथा राजसूय यज्ञ किए (नानाघाट अभिलेख से पुष्टि)।
- रानी नयनिका (नागनिका) ने नानाघाट अभिलेख लिखवाया।
- कलिंग नरेश खारवेल के हाथीगुम्फा अभिलेख में सातकर्णी का उल्लेख मिलता है — खारवेल ने पश्चिम की ओर सेना भेजी थी जिससे सातकर्णी से संघर्ष का संकेत मिलता है (निर्णायक परिणाम स्पष्ट नहीं)
- इसकी मृत्यु के बाद वंश कमजोर हुआ और शक (पश्चिमी क्षत्रप) शासकों, विशेषकर नहपान, ने मालवा, गुजरात, नासिक, पूना आदि क्षेत्रों पर अधिकार कर लिया।
गौतमीपुत्र सातकर्णी (सबसे महान शासक, लगभग प्रथम-द्वितीय शताब्दी ई.)
- सातवाहन वंश का सबसे शक्तिशाली और प्रतापी शासक, जिसने वंश की खोई हुई शक्ति पुनः स्थापित की।
- नासिक प्रशस्ति (इसकी माता गौतमी बालश्री द्वारा लिखवाया गया) में इसे इस प्रकार वर्णित किया गया है:
- “एकब्राह्मण” (ब्राह्मण वर्ण का अद्वितीय रक्षक)
- “क्षत्रिय-दर्प-मान-मर्दन” (क्षत्रियों के घमंड को कुचलने वाला)
- शक, यवन, पह्लव (विदेशी शक्तियों) का विनाशक
